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बुधवार, 20 अप्रैल 2011

जरा ठहर जा


जब मैं बेसब्री से तुम्हारा

करता हूं इन्तजार

तब तुम आती नहीं।

जब मैं तुमको भुलाना चाहता हूं

तब तुम अकस्मात ही मेरे सामने

आकर खड़ी हो जाती हो।

यूं आकर पल में छलावे

की तरह चल देती हो

कि मेरे दिल की धड़कने

चंद लम्हों के लिये

जाती हैं ठहर।

इसलिये तुमसे करबद्ध विनती है मेरी

या तो तुम सदा के लिये

मुझे अपना लो

या फ़िर मुझे अपनी

दुनिया में जीने दो।

ताकि मैं अपने और

सपनों को तो

कम से कम

पूरा कर सकूं।

फ़िर मैं खुद ही तुम्हारे

आगोश में समाने के

तैयार हूं पर

प्लीज अभी नहीं

जरा ठहर कर आना

ऐ मौत।

000 पूनम