
दवा ही बन ग़यी है जिन्दगी जिनकी,
दुआ कीजिये वो जहर न बने।
लहू जो दौड़ रहा जिस्म में,
दुआ कीजिये बेअसर न बने।
पिये जा रहे हैं गमों के चिलम,
दुआ कीजिये वो कहर न बन॥
नहीं देख सकता जो औरों का चैन,
दुआ कीजिये वो नज़र न बने।
समझता नहीं जो दर्द जिन्दगी का,
दुआ कीजिये वो जिगर न बने।
आबाद है जहां नेक इन्सानों से ही,
दुआ कीजिये वो वीराना शहर न बने।
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पूनम