
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर सभी पाठकों,चिट्ठाकारों को हार्दिक मंगल कामनाएं।
आज की मेरी कविता सभी महिलाओं को समर्पित है।
नारी
अबला नहीं आज तो
सशक्त है नारी
स्वाभिमान स्वावलंबन से
भरपूर है नारी।
चहारदीवारी के भीतर
और बाहर भी
अपने अस्तित्व के साथ
संपूर्ण है नारी।
कहीं पत्थर की मूरत तो
कहीं अहसास कोमल भी
कहीं शोला कहीं शबनम
कहीं परवाज है नारी।
जो छेड़े दिल के तार
ऐसी साज है नारी
हर रूप में अपने
नया अंदाज है नारी।
कई महान विभूतियों में
से एक है नारी
बूझ न पाए देव मुनि
ऐसी राज है नारी।
फ़िर भी क्यूं नहीं हम
मानने को हैं तैयार
आज तो समाज का एक
स्तम्भ है नारी।
********
पूनम
आज की मेरी कविता सभी महिलाओं को समर्पित है।
नारी
अबला नहीं आज तो
सशक्त है नारी
स्वाभिमान स्वावलंबन से
भरपूर है नारी।
चहारदीवारी के भीतर
और बाहर भी
अपने अस्तित्व के साथ
संपूर्ण है नारी।
कहीं पत्थर की मूरत तो
कहीं अहसास कोमल भी
कहीं शोला कहीं शबनम
कहीं परवाज है नारी।
जो छेड़े दिल के तार
ऐसी साज है नारी
हर रूप में अपने
नया अंदाज है नारी।
कई महान विभूतियों में
से एक है नारी
बूझ न पाए देव मुनि
ऐसी राज है नारी।
फ़िर भी क्यूं नहीं हम
मानने को हैं तैयार
आज तो समाज का एक
स्तम्भ है नारी।
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पूनम