पेड़ों की शाखाओं
के झरोखों से
जब छिटकती हैं
सूरज की किरणें
हरित पत्तियों पर
तो लगता है
प्रकृति के प्रांगण में
हर तरफ़
चांदी की थाल
पत्तों पर बिखर गयी है।
भोर में उगता सूरज
धीरे धीरे
अपने पदार्पण की सूचना
देता है
तब उसकी गुनगुनाती धूप
मन को ऊर्जा
और एक अनोखे
अहसास से
मानो भर जाती है।
दिन भर अपनी
पूरी सामर्थ्य दिखाकर
जब पत्तियों से
छनती हुयी चमक
धीरे धीरे कम
होती जाती है
तब साथ निभाने
प्रकृति का
रजनी मिलाती है हाथ
सूरज से
उसके पदागमन के साथ ही
प्रकृति के लिये
उसके प्रांगण में
उतर आयी रजनी
अपने पूरे मनोयोग के साथ
प्रकृति से
करने लगती है अठखेलियां ।
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पूनम