गुरुवार, 12 नवंबर 2009

गजल-- आख़िरी सलाम


खूने जिगर से लिख रहा हूं आखिरी सलाम
इल्तजा बस जरा सी कबूल इसको कर लेना।

इन्तजार करते करते हो गई इंतहा इंतजार की
दिले खयाल तब आया नहीं नसीब में तेरा दीदार होना।

जीते जी ना सही जब हो जाऊं सुपुर्दे खाक मैं
मजार पर आके मेरी अश्क दो बहा लेना।

तेरे दो अश्क ही मेरी मुहब्बत का ईनाम होंगे
मैं न सही मेरी कब्र के ही संग दो पल बिता लेना।

तेरी नफ़रत ही बनती गयी मेरी मुहब्बत का सबब
हो सके तो जरूर इसे अपनी कड़वी यादों बसा लेना।

खत्म हुये शिकवे गिले अब अलविदा तुझे कहता हूं
जब उठेगा जनाजा मेरा बस इक नजर डाल लेना।

चलो मैं हो गया रुखसत अब तेरे इस जहां से
जाकर कहूंगा ऐ खुदा मेरी मुहब्बत को आबाद रखना।
0000
पूनम

24 टिप्‍पणियां:

ktheLeo (कुश शर्मा) ने कहा…

सुन्दर भाव, अच्छी रचना!

राज भाटिय़ा ने कहा…

चलो मैं हो गया रुखसत अब तेरे इस जहां से
जाकर कहूंगा ऐ खुदा मेरी मुहब्बत को आबाद रखना।
आप की इस गजल का हर शेर लाजवाव है.
धन्यवाद

बेनामी ने कहा…

Bahur sundar.

Udan Tashtari ने कहा…

जीते जी ना सही जब हो जाऊं सुपुर्दे खाक मैं
मजार पर आके मेरी अश्क दो बहा लेना।

अच्छा है!!

मनोज कुमार ने कहा…

खत्म हुये शिकवे गिले अब अलविदा तुझे कहता हूं
जब उठेगा जनाजा मेरा बस इक नजर डाल लेना।
वेदना, करुणा और दुःखानुभूति का अच्छा चित्रऩ।

Unknown ने कहा…

तेरे दो अश्क ही मेरी मुहब्बत का ईनाम होंगे
मैं न सही मेरी कब्र के ही संग दो पल बिता लेना।
poonamji ...
wah
..bahut hi badiya sher hai sare ...bahut acha likha ye shaer ..badhai

रश्मि प्रभा... ने कहा…

तेरी नफ़रत ही बनती गयी मेरी मुहब्बत का सबब
हो सके तो जरूर इसे अपनी कड़वी यादों बसा लेना।
........... बहुत बढिया

Unknown ने कहा…

umda gzazal.........

Apanatva ने कहा…

खत्म हुये शिकवे गिले अब अलविदा तुझे कहता हूं
जब उठेगा जनाजा मेरा बस इक नजर डाल लेना।

bhut sunder bhav aur ek pyaree rachana.

निर्मला कपिला ने कहा…

जीते जी ना सही जब हो जाऊं सुपुर्दे खाक मैं
मजार पर आके मेरी अश्क दो बहा लेना।
बहुत अच्छी लगी आपकी रचना शुभकामनायें

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

khoobsurat ghazal....badhai

Urmi ने कहा…

जीते जी ना सही जब हो जाऊं सुपुर्दे खाक मैं
मजार पर आके मेरी अश्क दो बहा लेना।
तेरे दो अश्क ही मेरी मुहब्बत का ईनाम होंगे
मैं न सही मेरी कब्र के ही संग दो पल बिता लेना।
वाह झरोखा जी बहुत सुंदर ग़ज़ल लिखा है आपने! हर एक पंक्तियाँ लाजवाब है! एक से बढ़कर एक शेर हैं सारे!

दिगम्बर नासवा ने कहा…

चलो मैं हो गया रुखसत अब तेरे इस जहां से
जाकर कहूंगा ऐ खुदा मेरी मुहब्बत को आबाद रखना..

Bahoot lajawaab gazal ... rard bhare sher.... man ki udaasi ki jhalak milti hai sheron mein ... achha likha hai ...

sandhyagupta ने कहा…

Wah aap to ghazal bhi likhti hain !

Alpana Verma ने कहा…

जीते जी ना सही जब हो जाऊं सुपुर्दे खाक मैं
मजार पर आके मेरी अश्क दो बहा लेना।
waah! Poonam ji bahut hi achche ghazal likhi hai..
aap ki ab tak ki sab se achchhe gazal lagi mujhe yah..
sabhi sher bahut khoob!

ज्योति सिंह ने कहा…

तेरी नफ़रत ही बनती गयी मेरी मुहब्बत का सबब
हो सके तो जरूर इसे अपनी कड़वी यादों बसा लेना।
bahut dard bhari man ko chhooti hui rachna ,umda

Dr. Ashok Kumar Mishra ने कहा…

सटीक लेखन। उत्कृष्ट अभिव्यक्ति।
अच्छा लिखा है आपने। कथ्य और शिल्प दोनों स्तरों पर रचना प्रभावित करती है।

मैने अपने ब्लाग पर एक लेख लिखा है-घरेलू हिंसा से लहूलुहान महिलाओं का तन और मन-समय हो तो पढ़ें और कमेंट भी दें-
http://www.ashokvichar.blogspot.com

मेरी कविताओं पर भी आपकी राय अपेक्षित है। कविता का ब्लाग है-
http://drashokpriyaranjan.blogspot.com

कविता रावत ने कहा…

चलो मैं हो गया रुखसत अब तेरे इस जहां से
जाकर कहूंगा ऐ खुदा मेरी मुहब्बत को आबाद रखना।
Pyar samarpit bhav se kiya ho to isi tatrah ki aawaj dil mein gungaymaan hoti hai .......

हरकीरत ' हीर' ने कहा…

तेरे दो अश्क ही मेरी मुहब्बत का ईनाम होंगे
मैं न सही मेरी कब्र के ही संग दो पल बिता लेना।

वाह..... मोहब्बत के रंग में डूबी लाजवाब नज़्म पूनम जी ....हर शेर जिगर के आर-पार होता हुआ ....बहूत खूब....!!

संजय भास्‍कर ने कहा…

बहुत अच्छी लगी आपकी रचना शुभकामनायें

संजय भास्‍कर ने कहा…

बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
ढेर सारी शुभकामनायें.

संजय कुमार
हरियाणा
http://sanjaybhaskar.blogspot.com
Email- sanjay.kumar940@gmail.com

BrijmohanShrivastava ने कहा…

इन्तजार की इन्तहा होने पर खून (जिगर का ) से आखिरी सलाम लिखना और मजार पर आकर आंसू बहाने की प्रार्थना जफ़र साह्ब ने दूसरी तरह से लिखा था "पये फ़ातिहा कोई आये क्यों , कोई चार फूल चडाये क्यों, कोई आके शमअ जलाये क्यों...। जब जनाजा उठे तब एक नजर डाल लेना मगर होता क्या है "उनकी गली से मेरा जनाजा निकला , वो न निकले जिनकी खातिर जनाजा निकला"अन्तिम शेर बहुत उत्तम खुदा से कहूंगा .....।बाल दिवस की रचना फ़ुलबगिया ब्लाग पर भी पढी

करण समस्तीपुरी ने कहा…

सुभान अल्लाह !!

mark rai ने कहा…

जीते जी ना सही जब हो जाऊं सुपुर्दे खाक मैं
मजार पर आके मेरी अश्क दो बहा लेना...
i am wordless........one of the best rachna in blog jagat...