गुरुवार, 25 फ़रवरी 2010

पैगाम


ख्वाबों में ही छलनी हो, गया जिगर जिसका

वही तो जिगर हमारा है, वहीं तो जिकर हमारा है।

खयालों के धागे बुनते बुनते, कुछ बिगड़े कुछ सूत बने।

वही तो फ़िर उम्मीद बने, वही तो फ़िर सहारा है।

सूरज चांद बादल सारे, झिलमिल करते ये तारे

वही धरती ,नील गगन हमारा, वही तो प्यारा नजारा है।

वही पोखर ,वही नदियां,वही लहरें समुन्दर की

वही सुनामी बन जाती कभी, वही प्यासे की अमृतधारा है।

जिस्म भी एक जान भी एक, है रंग गोरा, काला तो क्या

वही मन सबका एक हो गर ,तो बदले जहां ये सारा है।

वही सोना, वही चांदी, वही मोती, मांनिक भी

खान से कोयले के निकले जो, वही तो हीरा हमारा है।

जो रंगत रक्त की एक ही है,तो नफ़रत क्यों पनपती है

जीतें दिलों को मोहब्बत से, यही पैगाम हमारा है।

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पूनम

24 टिप्‍पणियां:

डॉ. महफूज़ अली (Dr. Mahfooz Ali) ने कहा…

वही सोना, वही चांदी, वही मोती, मांनिक भी

खान से कोयले के निकले जो, वही तो हीरा हमारा है।


जो रंगत रक्त की एक ही है,तो नफ़रत क्यों पनपती है

जीतें दिलों को मोहब्बत से, यही पैगाम हमारा है।



बहुत सुंदर ...पंक्तियों..... के साथ बहुत सुंदर रचना...



आपको होली की बहुत बहुत शुभकामनाएं...

Unknown ने कहा…

बहुत ही सराहनीय प्रयास है
सामान्य ज्ञान के लिए मेरे ब्लॉग पर भी आप सादर आमंत्रित है
http://gyansarita.blogspot.com/

राज भाटिय़ा ने कहा…

ख्वाबों में ही छलनी हो, गया जिगर जिसका

वही तो जिगर हमारा है, वहीं तो जिकर हमारा है।
अजी ऎसे ख्वाब मत देखे जो खुन खरावा करते हो...
बहुत सुंदर लगा आप का यह पैगाम
धन्यवाद

Amitraghat ने कहा…

"भावुकता से भरी पंक्तियाँ..."
प्रणव सक्सैना amitraghat.blogspot.com

एक कविता अर्थहीन ,श्याम – शवेत तथा मौन । ने कहा…

बहुत ही सराहनीय प्रयास है....
जो रंगत रक्त की एक ही है,तो नफ़रत क्यों पनपती है

जीतें दिलों को मोहब्बत से, यही पैगाम हमारा है।

बहुत सुंदर

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

बहुत अच्छी खबर है!
ख्बाब सत्य नही होते हैं!

मनोज कुमार ने कहा…

बेहद पसंद आई।

रानीविशाल ने कहा…

बेहद खुबसुरत अभिव्यक्ती.....बहुत अच्छी तरह अपनी भावनाए बताइ आपने सुन्दर सन्देश के साथ...ध्न्यवाद!
http://kavyamanjusha.blogspot.com/

संजय भास्‍कर ने कहा…

आपको होली की बहुत बहुत शुभकामनाएं...

Udan Tashtari ने कहा…

बेहतरीन अभिव्यक्ति!

Apanatva ने कहा…

जो रंगत रक्त की एक ही है,तो नफ़रत क्यों पनपती है

जीतें दिलों को मोहब्बत से, यही पैगाम हमारा है।

Bahut sunder bhav aur sandesh liye hai aapkee ye rachana.............
Ati sunder .
Badhai

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत प्यारा पैगाम....खूबसूरत अभिव्यक्ति.

होली की शुभकामनायें

रश्मि प्रभा... ने कहा…

ek khoobsurat geet hai yah rachna

अनामिका की सदायें ...... ने कहा…

sunder bhaavo se sazi pyari rachna.

Parul kanani ने कहा…

sundar..!

Apanatva ने कहा…

Happy holi.

दिगम्बर नासवा ने कहा…

जीतें दिलों को मोहब्बत से, यही पैगाम हमारा है..
सच कहा ..........
आपको और आपके समस्त परिवार को होली की शुभ-कामनाएँ ...

रचना दीक्षित ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना
ख्वाबों में ही छलनी हो, गया जिगर जिसका
वही तो जिगर हमारा है, वहीं तो जिकर हमारा है।
आपको व आपके परिवार को होली की हार्दिक शुभकामनायें

देवेन्द्र पाण्डेय ने कहा…

अच्छे भाव.
आपको होली की ढेर सारी शुभकामनाएँ.

Alpana Verma ने कहा…

बहुत अच्छी रचना पूनम जी.
सुन्दर सन्देश!
आपको सपरिवार होली की बहुत बहुत शुभकामनाएं

Amitraghat ने कहा…

"पूनम जी होली की ढेर सारी शुभकामनाएँ......."

प्रणव सक्सैना
amitraghat.blogspot.com

Urmi ने कहा…

आपको और आपके परिवार को होली पर्व की हार्दिक बधाइयाँ एवं शुभकामनायें!

शरद कोकास ने कहा…

इस अवसर पर मोहब्बत का यह पैगाम अच्छा लगा ।

सम्वेदना के स्वर ने कहा…

जिसके प्रियतम दूर बसे उससे पूछो होली का हाल
सारे रंग हैं जल के जैसे, और हुई वो जल कर श्याम.
अब तो आ जा प्रियतम प्यारे ओ मेरे हमजोली
दूरी तो बस कब की हो ली, आज मिलन की होली.

पूनम जी आपकी पंक्तियों का संयोजन एवं शब्दों का चयन अतुलनीय है..
भावों की सच्ची अभिव्यक्ति के लिए साधुवाद!!