
चंदा की छाँव तले
तारों की बारात चली
ओढ़ के रुपहली चूनर
टिमटिमाती रात चली।
पूरब से पश्चिम तक
उत्तर से दक्षिण तक
मानो आसमानी चादर से
सुनहली सी धूप खिली।
सतरंगे बादल भी
मद मस्त हो चले
रह रह के दामिनी भी
लुका छिपी खेल चली।
शीतल हवाओं ने जो
छेड़ी संगीत सुरीली
आस्मां के मंडप में
शहनाई सी गूँज चली।
भोर की बेला ने
मुस्कुरा के ली अंगडाई
ली विदाई तारों ने
जब सूरज की आंख खुली।
००००००००००
पूनम
तारों की बारात चली
ओढ़ के रुपहली चूनर
टिमटिमाती रात चली।
पूरब से पश्चिम तक
उत्तर से दक्षिण तक
मानो आसमानी चादर से
सुनहली सी धूप खिली।
सतरंगे बादल भी
मद मस्त हो चले
रह रह के दामिनी भी
लुका छिपी खेल चली।
शीतल हवाओं ने जो
छेड़ी संगीत सुरीली
आस्मां के मंडप में
शहनाई सी गूँज चली।
भोर की बेला ने
मुस्कुरा के ली अंगडाई
ली विदाई तारों ने
जब सूरज की आंख खुली।
००००००००००
पूनम