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बुधवार, 6 अक्टूबर 2010

बन जाओ अफ़साना


तुम गीत गज़ल बन करके

मेरे सपनों में आना

मैं शब्द शब्द बन जाऊंगी

तुम बनना नया तराना।

मैं सुर संगम बन जाऊंगी

तुम तान सुरीली गाना

मैं मधुर कण्ठ से गाऊंगी

तुम लयबद्ध हो जाना।

मैं प्रेम मग्न हो जाऊंगी

तुम भी साथ निभाना

मैं बनूंगी मीरा राधा

तुम कृष्ण मेरे बन जाना।

मैं बनूंगी शृंगार का प्याला

तुम उसमें डूब जाना

मैं बनूंगी तुम्हारी शमा

तुम बन जाना परवाना।

मैं नहीं बनूंगी ऐसी शमा

अकेले ही जल जाऊं

वादा है इक तुमसे

तुम मेरे संग जल जाना।

तब देखेगी ये दुनिया

जोड़ी ये गीत गज़ल की

हम भी बन जायेंगे फ़िर

एक नया अफ़साना।

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पूनम