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रविवार, 28 फ़रवरी 2010

फ़ागुन रीता जाये ना


दिन फ़ागुनी रंग बासन्ती

मौसम भीना भीना सा

इंतजार तेरा करते करते

बीते सावन का महीना ना॥

मौसम ने ली है अंगड़ाई

अब तो प्रियतम आ जाना

तेरे बिन हर पल अब तो

मेरे जी को भाये ना।…

संग सहेलियां इतराती

हौले हौले फ़ागुन गा्यें ना

हंसी ठिठोली मुझसे करतीं

जो मेरे जी को जलायें ना॥

रिमझिम बारिश की फ़ुहारें

अब तो अच्छी लागें ना

लगता जैसे वो हसीं उड़ातीं मेरी

दिल मे तीर सी चु्भोयें ना।

बीत गया सावन का महीना

बीती पिछली दिवाली ना

कहे मेरा दिल रो रो करके

अब के फ़ागुन में आना ना॥

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पूनम