
दिन फ़ागुनी रंग बासन्ती
मौसम भीना भीना सा
इंतजार तेरा करते करते
बीते सावन का महीना ना॥
मौसम ने ली है अंगड़ाई
अब तो प्रियतम आ जाना
तेरे बिन हर पल अब तो
मेरे जी को भाये ना।…
संग सहेलियां इतराती
हौले हौले फ़ागुन गा्यें ना
हंसी ठिठोली मुझसे करतीं
जो मेरे जी को जलायें ना॥
रिमझिम बारिश की फ़ुहारें
अब तो अच्छी लागें ना
लगता जैसे वो हसीं उड़ातीं मेरी
दिल मे तीर सी चु्भोयें ना।
बीत गया सावन का महीना
बीती पिछली दिवाली ना
कहे मेरा दिल रो रो करके
अब के फ़ागुन में आना ना॥
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पूनम
