सोमवार, 7 सितंबर 2015
शुक्रवार, 21 अगस्त 2015
बंदर जी की शादी
रविवार, 9 अगस्त 2015
चंदा मामा
गुरुवार, 13 नवंबर 2014
फ़रियाद
शुक्रवार, 2 मई 2014
मौसी की चालाकी
शनिवार, 29 मार्च 2014
ये भी तो कुछ कहते हैं-----
मंगलवार, 4 फ़रवरी 2014
छुक छुक गाड़ी-----।
शनिवार, 5 मार्च 2011
चींटी की कोशिश

चींटी चढ़ी पहाड़ पर
फ़िसलती गिरती बार-बार
जितना ही वो कोशिश करती
आ गिरती नीचे धाड़-धाड़ ।
दूर से देख रहा था बंदर
बैठा बैठा डाल पर
देख को चींटी को बेहाल
तरसा उसके हाल पर।
बोला ज़ोर से-“ओ नन्हीं चींटी
क्यों करती कोशिश खाली पीली
गिर गयी जो तू नीचे
बचेगी ना फ़िर हड्डी पसली।
चढ़ना छोड़ पहाड़ पे तू
ये तेरे बस की बात नहीं
पहाड़ पे यूँ ही चढ़ जाना
इतना है आसान नहीं।”
चींटी बोली –“बंदर भैया
क्यों मेरी हिम्मत गिराते हो?
कोशिश से ही मिलती मंज़िल
क्या तुम ये नहीं जानते हो?”
बंदर बोला-“कर लो कर लो
कोशिश चाहे लाखों बार
हाथ ना आयेगी मंज़िल
चाहे आज़मा लो फ़िर एक बार।”
सुन चींटी को आया जोश
बोली “अब तो ज़रूर चढ़ूँगी
चाहे जां चली ही जाये
चढ़ कर ही मैं दम लूँगी।”
आखिर कोशिश दम लाई
चींटी खुशी से चिल्लाई
“चढ़ी पहाड़,मैं जीत गयी
देख लिया बंदर भाई!”
बंदर ने खुश हो दी बधाई
“बात पते की तूने बताई
कोशिश नहीं जाती बेकार
समझ में मेरे अब आयी।”
पूनम
सोमवार, 10 अगस्त 2009
बालगीत
नाना जी की मूँछ
जैसे गिलहरी जी की पूंछ
अकड़ी रहती हरदम ऐसे
जैसे कोई रस्सी गयी हो सूख।
नाना जी मूँछों पर अपनी
हरदम देते ताव
पहलवान जी जैसे कोई
जीत गए हों दाँव।
कभी दाई मूँछ तो कभी बांई फ़ड़कती
कभी ऊपर उठती कभी नीचे गिरती
दरोगा की मूँछ भी
उनके आगे पानी भरती ।
नाना जी की मूँछ हरदम
ऐंठन में ही रहती
शान न गिरने पाए कभी
हरदम कोशिश करती ।
नाना जी की मूँछ की
गली गाँव में पूछ
फ़ेल हो गई उनके आगे
नत्थू राम की मूँछ ।
0000
पूनम








.jpg)
.jpg)

.jpg)

