
जमाने ने रुसवा किया है मगर
हमें उनसे कोई शिकायत नहीं है।
बद अच्छा बदनाम बुरा
ये जुमला उन्हीं की अमानत रही है।
कदम दर कदम हमें धोखा दिया
ये हमेशा से उनकी फ़ितरत रही है।
न समझा जमाने ने मुझको जरा भी
न ही समझने कि उसे फ़ुर्सत रही है।
जहां में अकेले हमीं तो नहीं
जिसे दर्द सहने की आदत नहीं है।
शिकवा करे किसी से भी क्यों
जब खुदा की ही हम पर इनायत नहीं है।
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पूनम