शनिवार, 16 जून 2012
गज़ल
रविवार, 27 मार्च 2011
रुसवाई

जमाने ने रुसवा किया है मगर
हमें उनसे कोई शिकायत नहीं है।
बद अच्छा बदनाम बुरा
ये जुमला उन्हीं की अमानत रही है।
कदम दर कदम हमें धोखा दिया
ये हमेशा से उनकी फ़ितरत रही है।
न समझा जमाने ने मुझको जरा भी
न ही समझने कि उसे फ़ुर्सत रही है।
जहां में अकेले हमीं तो नहीं
जिसे दर्द सहने की आदत नहीं है।
शिकवा करे किसी से भी क्यों
जब खुदा की ही हम पर इनायत नहीं है।
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पूनम
शनिवार, 5 फ़रवरी 2011
मुस्कुराहट

कि बेबसी को भी इक दिन तूम पर न तरस आये।
गम के आंसुओं में मत डुबाओ किसी को इस कदर
कहीं इक दिन तुम्हारा भी दामन न उसमें तर जाये।
मत खोदो मौत के गड्ढे किसी के लिये भी तुम
कहीं खुद तुम्हारे ही पांव न उसमें धंस जायें।
किसी के प्यार का सिला इतनी नफ़रत से न दो
कहीं वो अंजाम तुम्हारे ही साथ न हो जाये।
बस प्यार भरा दिल रख ज़रा देख लो इतना
तुम्हारी मुस्कुराहट से ही किसी की ज़िन्दगी संवर जाये।
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पूनम
बुधवार, 27 अक्टूबर 2010
खोया अतीत

लोगों की भीड़ में खो गया है जो कहीं
आज भी मैं ढूँढता हूँ अपने उस मकान को।
अरसे पहले जिसे छोड़ कर चला गया था
आज देखता हूँ मैं शहर में बदले अपने गाँव को।
कुछ निशानियाँ थीं मशहूर जो मेरे घर की
उनकी जगहों पर पाता हूँ लम्बी लम्बी इमारतों को।
पुरवैया बहती थी जो मेरे घर के सामने
ढूँढ रहीं नज़रें मेरी उस नीम की ठंडी छांव को।
गप्प लड़ाया करते थे जहाँ खड़े खड़े यार सभी
आज आ गये आँख में आँसू याद कर उन शामों को।
चच्चा के नाम से थे मशहूर जो मेरे घर के दाहिने
खोजती हैं नज़रें उनकी पान की दुकान को।
देखते ही देखते मानो सब कुछ बदल गया
खड़ा हूँ अचम्भे से देख दुनिया के बदलते रंग को।
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पूनम
शनिवार, 18 सितंबर 2010
दिल की लगी

कुछ कहने से पहले ही अश्क छलक जाते हैं।
जब भी करती हूं बात करने की कोशिश
या खुदा होंठ थरथरा के ही रह जाते हैं।
ऐसा होता है क्यों ये समझ पाती नहीं
धड़कनें भी दिल की धड़कते ही रह जाते हैं।
पहले खुद को आजमाती हूं ये कमी है क्या कोई
पर ये बातें तो अपने ही बता पाते हैं।
जब भी होगी मुलाकातें उनसे बातें तो होंगी हीं
बात दिल की वो मेरी नजरों से समझ जाते हैं।
बातें दो चार करके जब मैं उनसे लेती हूं रुखसत
कदम आगे न बढ़ के यूं पीछे को ही मुड़ जाते हैं।
पलटती हूं तो उनकी नजरें भी होती हैं इधर ही
शायद इसको ही दिल की लगी कहते हैं।
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पूनम