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शनिवार, 27 जून 2009

सत्य के पर्याय


सच्चाई के आज मायने बदल गये,
सच पर झूठ के ताले पड़ गये।

कानून की आंख पर पट्टी बंधी,
हाथ भी रिश्वत की तराजू में तौल गये ।

पैसों के बोझ तले गुनहगार बच गये,
बेगुनाह आज देखो गुनहगार बन गये।

अपराधी दण्डित हों पर बेगुनाह न सजा पाये,
कानून की किताब से ये शब्द हट गये।

सत्य को बचाने में जो कदम आगे बढ़े,
वो झूठ और फ़रेब के दलदल में फ़ंस गये।

सत्यमेव जयते के अर्थ कहीं खो गये,
बेईमानी धोखाधड़ी आज सत्य के पर्याय बन गये।
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पूनम