तुम्हारी
याद मे आंसू आंखों से छलकते हैं,
सावन
के बारिश ज्यूं मेघों से बरसते हैं।
तुम
जो गये तो बस दिल ही टूट गया,
वो
जिगर कहाँ से लाऊँ जो पत्थर के होते हैं।
चौबीस
पहर तस्वीर तेरी इन आंखों में बसती हैं,
मिटाऊँ
कैसे उनको जो नज़रों से ओझल नही होते हैं।
दिलासा
देते तो जाते हो की जल्दी ही आऊँगा,
और
हम इन्तज़ार में पल-पल फ़िर गिनने लगते हैं।
बिन
तुम्हारे ज़िंदगी अधूरी सी लगती है,
अब
के आकर ना जाना वादा इक तुमसे लेते हैं।
आयेगा
खत का जवाब यही ख्वाब देखते हैं,
इसी
उम्मीद को दामन से लिये हम तो जीते हैं।
000
पूनम