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शनिवार, 13 मई 2017

माँ तुझे प्रणाम




माँ तुझे प्रणाम
शत शत नमन कोटि प्रणाम
माँ तुझे प्रणाम ।

जब मैं  तेरी कोख में आई
तूने स्पर्श से बताया था
ममता का कोई मोल नहीं
तूने ही सिखलाया था ।
माँ तुझे प्रणाम ।

थाम के मेरी उंगली तूने
इस दुनिया से मिलवाया था
सूरज चाँद और धरती तारे
सबके गीत सुनाया था 
माँ तुझे प्रणाम ।

कदम लडखडाये जो मेरे
तूने भी कदम बढाया था
सही गलत की राह भी
तो तूने ही सिखलाया था ।
माँ तुझे प्रणाम ।

ज्यों ज्यों ही बढ़े चले हम
ऊंच नीच की आई समझ
हम सबसे पहले हैं इंसान
तूने हो समझाया था ।
माँ तुझे प्रणाम ।

कभी किसी भी पल में यदि
कोई मुसीबत हम पे आई
अडिग बन चट्टान सी तूने
हर मुश्किल से लड़ना सिखलाया।
माँ तुझे प्रणाम ।

अर्पण है माँ तुझको हरदम
श्रद्धा के शब्द अबोल ये माँ
ममता त्याग धैर्य समर्पण
माँ तुझसे ही सब पाया है।
माँ तुझे प्रणाम ।

सारी दुनिया तुझमें  समाई
सच में तेरा मोल नहीं
तू सबसे अनमोल है माँ  
माँ तुझे प्रणाम ।
००००
पूनम श्रीवास्तव





रविवार, 10 मई 2009

मातृ दिवस

मां शब्द ही अवर्णनीय,अतुलनीय है।उनके बारे में लिखना किसी के लिये सम्भ्व नहीं है।
दूसरे शब्दों में कह सकते हैं कि उनके लिये लिखना सागर की एक बूंद की तरह होगा।
आज मातृ दिवस पर मैं अपनी एक कविता प्रकाशित कर रही हूं।

मां
मां सिर्फ़ शब्द नहीं
पूरी दुनिया पूरा संसार है मां
अंतरिक्ष के इस पार से
उस पार तक का अंतहीन विस्तार है मां।
मां सिर्फ़ शब्द नहीं--------------------।

शिशु की हर तकलीफ़ों को रोके
ऐसी इक दीवार है मां
शब्दकोश में नहीं मिलेगा
वो कोमल अहसास है मां।
मां सिर्फ़ शब्द नहीं-------------------।

सृजनकर्ता सबकी है मां
प्रकृति का अनोखा उपहार है मां
ममता दया की प्रतिमूर्ति
ब्रह्म भी और नाद भी है मां।
मां सिर्फ़ शब्द नहीं---------------------।

स्वर लहरी की झंकार है मां
लहरों में भी प्रवाह है मां
बंशी की धुन है तो
रणचण्डी का अवतार भी है मां।
मां सिर्फ़ शब्द नहीं---------------------।

मां सिर्फ़ शब्द नहीं
पूरी दुनिया पूरा संसार है मां।
000000000000
पूनम


गुरुवार, 15 जनवरी 2009

माँ


मां है अगर तो समझो जीवन
सबका सुखमय बीता
मां का आंचल मिला न जिसको
उसका जीवन रीता।

उंगली पकड़ चलना सिखलाये
वात्सल्य स्नेह और ममता
मां को पल भर चैन न आए
यदि बच्चा करवट लेता.

जब मां की दुआएं साथ रहें
तो हर संकट टल जाता
ले लेती वो सारी बालाएं
जो उसके सम्मुख आतीं।

मां ही शक्ति मां ही भक्ति
मां ही मन की ज्ञाता
मां के चरणों का वंदन ही
तीरथ धाम कहाता।

मां बच्चे का प्यार अनूठा
जो रोम रोम में बहता
नहीं दिखाई देता इसके
जैसा दूजा रिश्ता।
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पूनम