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शनिवार, 9 मार्च 2013

अपने लिये भी---।


चुरा लो समय से कुछ पल
अपने लिये भी
मांग लो थोड़ा सा वक़्त
अपने लिये भी
कल रहो या न रहो
ढूंढ़ लो कोई ठिकाना
अपने लिये भी।

दूसरों पर और खुशियां
लुटाओगे कब तलक
बचा लो थोड़ी सी खुशी
अपने लिये भी।
कटु वचन को अपने अंदर
घोलोगे कब तलक
मांग लो दो शब्द प्रेम के
अपने लिये भी।
खुद जियो और जीने दो दूसरों को
मान लो इस सत्य को
अपने लिये भी।
000
पूनम


बुधवार, 23 जनवरी 2013

उड़ान


कुछ परिन्दों का दीदार कर लूं तो चलूं
सपनों को थोड़ा उड़ान दे दूं तो चलूं।

उड़ने से पहले ही पर कट न जाय कहीं
उनको कटने से बचा लूं तो चलूं।

झुग्गी झोपड़ियों में बहती है नीर की धारा
उनके आंसुओं को जरा पोंछ लूं चलूं।

उम्मीदों के दीप जो जलाए हैं हमने
उन्हें औरों तक पहुंचा दूं जरा तो चलूं।

कुछ पुण्य किये हैं तो पाप भी बहुत हमने
खुदा की इबादत कर लूं जरा तो चलूं।
000
पूनम



रविवार, 13 जनवरी 2013

यादों का सिलसिला


यादों का सिलसिला चलता है साथ साथ
यादों के साए से निकलना बड़ा मुश्किल।

गुजरता है जमाना गुजर जाते हैं लोग
बिखर जाता परिवार समेटना बड़ा मुश्किल।

कहते हैं वक्त हर मर्ज का इलाज पर
छोड़ गये हैं जो निशान उसे मिटाना बड़ा मुश्किल।

बीते हुये लम्हों का रहता ना हिसाब
फ़िर से जवाब पाना होता बड़ा मुश्किल।

ये समझना और समझाना होता नहीं आसान
जिन्दगी बख्शी जिसने उसी को समझाना बड़ा मुश्किल।

                0000
पूनम