बुधवार, 20 फ़रवरी 2013
बुधवार, 23 जनवरी 2013
उड़ान
कुछ परिन्दों का दीदार कर लूं तो चलूं
सपनों को थोड़ा उड़ान दे दूं तो चलूं।
उड़ने से पहले ही पर कट न जाय कहीं
उनको कटने से बचा लूं तो चलूं।
झुग्गी झोपड़ियों में बहती है नीर की धारा
उनके आंसुओं को जरा पोंछ लूं चलूं।
उम्मीदों के दीप जो जलाए हैं हमने
उन्हें औरों तक पहुंचा दूं जरा तो चलूं।
कुछ पुण्य किये हैं तो पाप भी बहुत हमने
खुदा की इबादत कर लूं जरा तो चलूं।
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पूनम
रविवार, 13 जनवरी 2013
यादों का सिलसिला
यादों का सिलसिला चलता है साथ साथ
यादों के साए से निकलना बड़ा मुश्किल।
गुजरता है जमाना गुजर जाते हैं लोग
बिखर जाता परिवार समेटना बड़ा मुश्किल।
कहते हैं वक्त हर मर्ज का इलाज पर
छोड़ गये हैं जो निशान उसे मिटाना बड़ा मुश्किल।
बीते हुये लम्हों का रहता ना हिसाब
फ़िर से जवाब पाना होता बड़ा मुश्किल।
ये समझना और समझाना होता नहीं आसान
जिन्दगी बख्शी जिसने उसी को समझाना बड़ा मुश्किल।
0000
पूनम
मंगलवार, 1 जनवरी 2013
नारी
मैं
किसी बंधन में बंधना नहीं जानती
नदी
के बहाव सी रुकना नहीं जानती
तेज
हवा सी गुजर जाये जो सर्र से
मैं
हूं वो मन जो ठहरना नहीं जानती।
वो
स्वाभिमान जो झुकना नहीं जानती
करती
हूं मान पर अभिमान नहीं जानती
जो
हाथ में आ के
निकल जाये पल में
मैं
हूं ऐसा मुकाम जो खोना नहीं जानती।
हाथ
बढ़ा कर समेटना है जानती
कंधे
से कंधा मिलाना है जानती
गिरते
हुये को संभालना है जानती
मैं
हूं आज की नारी जो सिसकना नहीं जानती।
मन
में बसाकर पूजना है जानती
आंखों
में प्यार व अधिकार है मांगती
मैं
हूं आज के युग की नारी
जो
धरा से अंबर तक उड़ान है मारती।
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पूनम
बुधवार, 26 दिसंबर 2012
चित्रात्मक--कहानी सोनू चिड़िया
सोनू चिड़िया और रुपहली दोस्त थीं। दोंनों पेड़ों पर फ़ुदक रही थीं।तभी सोनू को एक पेड़ पर एक बहुत सुन्दर रंग बिरंगा फ़ल दिखा।
सोनू बोली,“मैं ये फ़ल खाऊंगी।”
उसकी प्यारी दोस्त सुनहरी ने बहुत समझाया।मना किया।
“प्यारी सोनू,ये फ़ल
मत खा।इससे तेरा गला खराब होगा।”
पर सोनू ने उसकी बात नहीं सुनी।वह उस रंग बिरंगे फ़ल को चखने का लालच नहीं रोक
सकी।बस उसी दिन उसका गला खराब हो गया।गाना,बोलना सब बंद।
जंगल के सारे जानवर दुखी
रहते।सोनू के सुरीले गीत सभी को पसंद थे।सोनू भी उसी दिन से उदास रहने लगी।
पूरे छः महीनों तक न वह कहीं गा
सकी। न बोल सकी। बहुत
परेशान रही वह।पता नहीं कहां से उसने वो कसैला फ़ल चख लिया था।
एक दिन सबेरे दोनों दोस्त पेड़ की डाल पर बैठी थीं।आते जाते जानवरों को देख रही
थीं।दूसरी चिड़ियों का चहचहाना सुन उसकी आंखों में आंसू आ गये।
“पता नहीं मेरी
आवाज कभी ठीक होगी या नहीं।” उसने सोचा।
अचानक वहां एक गधा कहीं से भटकता हुआ आ गया।वह उसी पेड़ से अपनी पीठ रगड़ने लगा जिस पर दोनों बैठी थीं।शायद
उसकी पीठ खुजला रही थी।
पेड़ पतला था।गधे के पीठ रगड़ने पर वो हिलने लगा।पहले धीरे धीरे फ़िर तेजी से।
रुपहली और सोनू घबरा गईं। उन्हें लगा कहीं ये पेड़ गिर न जाय।
सोनू चीखी,“बच के रुपहली,ये
गधा हमें गिरा देगा।”उसकी आवाज सुन रुपहली चौंक गई।
“अरे सोनू,तू तो
बोल सकती है।”रुपहली चीखी।
“अरे सच में—मैं बोल सकती हूं। अब मैं फ़िर
गाऊंगी,चहचहाऊंगी।”सोनू जोर से चीखी।
सोनू और रुपहली चहचहाते हुये तेजी से उड़ीं।
दोनों चीख रही थीं। चहचहा रहीं थीं।गा रही थीं।पूरे जंगल में पंख फ़ैलाए उड़ रही
थीं।
जंगल के सारे जानवर भी खुशी मना रहे थे।
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पूनम श्रीवास्तव
मंगलवार, 20 नवंबर 2012
चाहत
बीते पलों को याद कर
जरा तुम मुस्कुरा लेना
तेरे साथ ही हूं मैं सदा
एहसास यही बस कर लेना।
मेरी जिन्दगी में आना भी
तेरा हुआ कुछ इस तरह से
बाद पतझड़ के ज्यूं
छुप के बसंत का आना ।
जुबां से कोई कुछ भी कहे
उस पर न यकीन करना
सजा रखा है दिल ने
बस तेरा आशियाना।
सागर है कितना गहरा
इससे न हैं हम वाकिफ़
तेरी नजरों में जब से डूबे
मुश्किल उबर भी पाना।
दिल की तो हर धड़कन
मेरी सांसों का शरमाया
जाना तुझी से हमने
जिन्दगी को यूं जी लेना।
दुआ रब से यही है मेरी
बस इतना करम तू करना
निकले जनाजा मेरा
मेरी मांग फ़िर से भरना।
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पूनम
शुक्रवार, 12 अक्टूबर 2012
कह दो हर दिल से-----
कह दो दिलों से आज कि इक दिल ने आवाज दी है
बन जाओ सहारे उनके जो कि बेसहारा हैं।
गुलामी की वो जंजीरें जो टूटी नहीं हैं अब तलक
तोड़ दो उन पाबन्दियों को जिन पर हक़ तुम्हारा है।
बड़ी फ़ुरसत से वो इक शै बनाई है खुदा ने
वो तुम इंसान ही तो हो जिसे उसने संवारा है।
वक़्त कब किसका बना है आज तलक हम कदम
करो ना इन्तजार उसका जो कि नहीं तुम्हारा है।
करने से पहले नेकी का अंजाम ना सोचो
समझो कि हर बात में उसका ही इशारा है।
000
पूनम
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