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रविवार, 29 मई 2016

जिन्दगी

जिन्दगी इक बोझ सी
लगने लगती है जब
जिन्दगी का रुख अपनी
तरफ़ नहीं होता
व्यर्थ और निरर्थक
पर तभी अचानक से
रुख पलट जाता है
खुशियों के कुछ
संकेतों से
और फ़िर
हम जिन्दगी से
प्रेम करने लगते हैं
और चल पड़ती है
जिन्दगी
खुशियों का निमन्त्रण पाकर
आगे मंजिल की तरफ़
एक अन्तहीन यात्रा पर
उल्लास से भरी।
  000
पूनम श्रीवास्तव


शनिवार, 18 जनवरी 2014

जिन्दगी----।

कहते हैं जिसे जिन्दगी उस जिन्दगी को ढूंढते हैं।
पोंछते हैं अश्कों को जीने का बहाना ढूंढ़ते हैं॥

खामोश है जुबान पर दिल ये रोता है।
कांटों भरी डगर पर हंसने का बहाना ढूंढ़ते हैं।।

थाम ले कोई हाथ जिस राह से भी गुजरे हम।
हम सफ़र मिल जाय सफ़र का बहाना ढूंढ़ते हैं॥

चाहत हर किसी की होती नहीं पूरी फ़िर भी
कोशिश का बहाना,खुदा के पास ढूंढ़ते हैं।।
000
पूनम


गुरुवार, 3 मई 2012

सफ़र


जिंदगी का सफ़र आसान है मगर,
मुश्किलों की भी कोई कमी तो नहीं।

फ़ूलों से भरी ये डगर है मगर,
कांटों की भी कोई कमी तो नहीं।

पंख देना अरमानों को आसान है मगर,
पर कतरने वालों की भी कमी तो नहीं।

मंजिल को पाना आसान है मगर,
हौसलों में हो गर कोई कमी तो नहीं।

ख्वाब पूरे हो जायें यूं जिंदगी के अगर,
मौत भी आ जाए तो कोई गम तो नहीं।
000
पूनम

रविवार, 22 मार्च 2009

कविता ----- जिन्दगी


कहते हैं जिसे जिन्दगी
उसे ढूँढती हूँ गली गली
क्या नाम है क्या उसका पता
पूछती हूँ गली गली।

आंख जबसे है खुली
मटमैली चादर सी धुली
दिन गुजरता फांकों में
रात कटे बदनाम गली।

मिल जाए गर मुझे जिन्दगी
पूछूंगी उससे कई सवाल
क्यों इंसानी रिश्तों में वह
दो पाटों के बीच ढली।

क्या अमीरों की शान जिन्दगी
या गरीबी की दास्तान जिन्दगी
क्यूं किसी को लगती अनमोल जिन्दगी
क्यों किसी को मौत जिन्दगी से लगती भली।

तू मुझे मिले या ना मिले
चलो कोई शिकवा नहीं
थक चुकी तुझे ढूंढ ढूंढ
अब तो शाम हो चली।

पर मेरा संदेश तेरे नाम है जिन्दगी
एक समय ऐसा आए
जब दिल के हर दरवाजे से निकले
प्रेम से भरी प्रेम गली।
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पूनम