
कहते हैं जिसे जिन्दगी
उसे ढूँढती हूँ गली गली
क्या नाम है क्या उसका पता
पूछती हूँ गली गली।
आंख जबसे है खुली
मटमैली चादर सी धुली
दिन गुजरता फांकों में
रात कटे बदनाम गली।
मिल जाए गर मुझे जिन्दगी
पूछूंगी उससे कई सवाल
क्यों इंसानी रिश्तों में वह
दो पाटों के बीच ढली।
क्या अमीरों की शान जिन्दगी
या गरीबी की दास्तान जिन्दगी
क्यूं किसी को लगती अनमोल जिन्दगी
क्यों किसी को मौत जिन्दगी से लगती भली।
तू मुझे मिले या ना मिले
चलो कोई शिकवा नहीं
थक चुकी तुझे ढूंढ ढूंढ
अब तो शाम हो चली।
पर मेरा संदेश तेरे नाम है जिन्दगी
एक समय ऐसा आए
जब दिल के हर दरवाजे से निकले
प्रेम से भरी प्रेम गली।
**********
पूनम
उसे ढूँढती हूँ गली गली
क्या नाम है क्या उसका पता
पूछती हूँ गली गली।
आंख जबसे है खुली
मटमैली चादर सी धुली
दिन गुजरता फांकों में
रात कटे बदनाम गली।
मिल जाए गर मुझे जिन्दगी
पूछूंगी उससे कई सवाल
क्यों इंसानी रिश्तों में वह
दो पाटों के बीच ढली।
क्या अमीरों की शान जिन्दगी
या गरीबी की दास्तान जिन्दगी
क्यूं किसी को लगती अनमोल जिन्दगी
क्यों किसी को मौत जिन्दगी से लगती भली।
तू मुझे मिले या ना मिले
चलो कोई शिकवा नहीं
थक चुकी तुझे ढूंढ ढूंढ
अब तो शाम हो चली।
पर मेरा संदेश तेरे नाम है जिन्दगी
एक समय ऐसा आए
जब दिल के हर दरवाजे से निकले
प्रेम से भरी प्रेम गली।
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पूनम




